Saturday, 1 August 2026

कविता. ५९४७ बदलाव से सपनों की।

                              बदलाव से सपनों की।

बदलाव से सपनों की सरगम आवाज दिलाती है दास्तानों को नजारों की आस अहमियत दिलाती है आशाओं की महफिल दिलाती है।

बदलाव से सपनों की पुकार कोशिश दिलाती है उम्मीदों को तरानों की सोच पहचान दिलाती है इरादों की महफिल दिलाती है।

बदलाव से सपनों की सुबह अंदाज दिलाती है कदमों को अल्फाजों की कहानी दुनिया दिलाती है लहरों की महफिल दिलाती है।

बदलाव से सपनों की परख तलाश दिलाती है खयालों को अंदाजों की लहर अरमान दिलाती है जज्बातों की महफिल दिलाती है।

बदलाव से सपनों की रोशनी मुस्कान दिलाती है किनारों को धाराओं की सरगम आहट दिलाती है नजारों की महफिल दिलाती है।

बदलाव से सपनों की पहचान उमंग दिलाती है राहों को लम्हों की आवाज इशारा दिलाती है एहसासों की महफिल दिलाती है।

बदलाव से सपनों की उम्मीद आहट दिलाती है अल्फाजों को राहों की परख अंदाज दिलाती है अदाओं की महफिल दिलाती है।

बदलाव से सपनों की समझ सहारा दिलाती है अरमानों को कदमों की अदा पुकार दिलाती है लम्हों की महफिल दिलाती है।

बदलाव से सपनों की कोशिश उजाला दिलाती है आशाओं को किनारों की उम्मीद रोशनी दिलाती है दिशाओं की महफिल दिलाती है।

बदलाव से सपनों की कहानी लहर दिलाती है खया‌लों को अफसानों की सोच एहसास दिलाती है आवाजों की महफिल दिलाती है।


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कविता. ५९४७ बदलाव से सपनों की।

                              बदलाव से सपनों की। बदलाव से सपनों की सरगम आवाज दिलाती है दास्तानों को नजारों की आस अहमियत दिलाती है आशाओं की म...