Thursday, 27 August 2026

कविता. ५९७३ हर सुबह की किरणें अलग।

                           हर सुबह की किरणें अलग।

हर सुबह की किरणें अलग एहसास दिलाती है लम्हों को एहसासों की कोशिश जज्बात दिलाती है तरानों की सरगम सुनाती है।

हर‌ सुबह की किरणें अलग उमंग दिलाती है दास्तानों को नजारों की सोच खयाल दिलाती है आशाओं की सरगम सुनाती है।

हर‌ सुबह की किरणें अलग अफसाना दिलाती है इरादों को अफसानों की मुस्कान रोशनी दिलाती है अंदाजों की सरगम सुनाती है।

हर सुबह की किरणें अलग पहचान दिलाती है अरमानों को धाराओं की समझ आवाज दिलाती है दिशाओं की सरगम सुनाती है।

हर सुबह की किरणें अलग नजारा दिलाती है अदाओं को लहरों की कहानी अल्फाज दिलाती है उजालों की सरगम सुनाती है।

हर सुबह की किरणें अलग तलाश दिलाती है धाराओं को उम्मीदों की सौगात तराना दिलाती है कदमों की सरगम सुनाती है।

हर सुबह की किरणें अलग पुकार दिलाती है इरादों को अफसानों की आस खयाल दिलाती है राहों की सरगम सुनाती है।

हर सुबह की किरणें अलग लहर दिलाती है नजारों को दास्तानों की आहट पहचान दिलाती है इशारों की सरगम सुनाती है।

हर सुबह की किरणें अलग सपना दिलाती है बदलावों को बदलावों की पुकार उम्मीद दिलाती है लहरों की सरगम सुनाती है।

हर सुबह की किरणें अलग उजाला दिलाती है कदमों को अल्फाजों की आहट पुकार दिलाती है खयालों की सरगम सुनाती है।

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कविता. ६०१५ उजालों की सुबह संग।

                          उजालों की सुबह संग। उजालों की सुबह संग आशाओं से तलाश इशारा देकर जाती है अरमानों को लम्हों की रोशनी सरगम सुनाकर जात...