Tuesday, 6 October 2026

कविता. ६००३ एक आवाज संग।

                                एक आवाज संग।

एक आवाज संग आशाओं की महफिल पहचान दिलाती है किनारों को उजालों की रोशनी अहमियत दिलाती है।

एक आवाज संग नजारों की मुस्कान तलाश दिलाती है दिशाओं को बदलावों की दास्तान अफसाना दिलाती है।

एक आवाज संग जज्बातों की अल्फाज सरगम दिलाती है खयालों को सपनों की पहचान अंदाज दिलाती है।

एक आवाज संग बदलावों की सरगम अफसाना दिलाती है एहसासों को अरमानों की कोशिश कहानी दिलाती है।

एक आवाज संग दास्तानों की अहमियत बदलाव दिलाती है इरादों को अंदाजों की रोशनी किनारा दिलाती है।

एक आवाज संग लहरों की जरूरत दास्तान दिलाती है उम्मीदों को जज्बातों की मुस्कान खयाल दिलाती है।

एक आवाज संग अरमानों की सोच उमंग दिलाती है उजालों को नजारों की पहचान एहसास दिलाती है।

एक आवाज संग कदमों की सौगात बदलाव दिलाती है अफसानों को खयालों की तलाश अहमियत दिलाती है।

एक आवाज संग तरानों की सुबह अरमान दिलाती है आशाओं को जज्बातों की सरगम अल्फाज दिलाती है।

एक आवाज संग‌ उम्मीदों की परख खयाल दिलाती है नजारों को दिशाओं की अहमियत मुस्कान दिलाती है।





No comments:

Post a Comment

कविता. ६००३ एक आवाज संग।

                                एक आवाज संग। एक आवाज संग आशाओं की महफिल पहचान दिलाती है किनारों को उजालों की रोशनी अहमियत दिलाती है। एक आवाज...