Wednesday, 7 October 2026

कविता. ६००४ एहसास की पुकार नया।

                            एहसास की पुकार नया।

एहसास की पुकार नया इशारा देकर जाती है अरमानों को लम्हों की सरगम आवाज‌ सुनाती है उजालों को सपनों की तलाश देकर जाती है।

एहसास की पुकार नया अंदाज देकर जाती है जज्बातों को बदलावों की पुकार अफसाना सुनाती है अदाओं को राहों की तलाश देकर जाती है।

एहसास की पुकार नया सपना देकर‌ जाती है दास्तानों को नजारों की अहमियत मुस्कान सुनाती है तरानों को बदलावों की तलाश देकर जाती है।

एहसास की पुकार नया नजारा देकर जाती है खयालों को अल्फाजों की दुनिया पहचान सुनाती है आशाओं को उम्मीदों की तलाश देकर जाती है।

एहसास की पुकार नया तराना देकर जाती है कदमों को धाराओं की आस कोशिश सुनाती है आवाजों को लम्हों की तलाश देकर जाती है।

एहसास की पुकार नया इरादा देकर जाती है अंदाजों को लहरों की रोशनी अहमियत सुनाती है किनारों को दिशाओं की तलाश देकर जाती है।

एहसास की पुकार नया आस देकर‌ जाती है आशाओं को कदमों की परख खयाल सुनाती है अल्फाजों को अंदाजों की तलाश देकर जाती है।

एहसास की पुकार नया खयाल देकर जाती है अल्फाजों को राहों की सौगात सरगम सुनाती है इरादों को अफसानों की तलाश देकर जाती है।

एहसास की पुकार नया सुबह देकर जाती है धाराओं को किनारों की मुस्कान आस सुनाती है तरानों को नजारों की तलाश देकर जाती है।

एहसास की पुकार नया सौगात देकर जाती है खयालों को सपनों की अहमियत कोशिश सुनाती है उम्मीदों को दास्तानों की तलाश देकर जाती है।

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कविता. ६००४ एहसास की पुकार नया।

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