Friday, 30 October 2026

कविता. ६०२७ खयाल की सरगम अक्सर।

                          खयाल की‌ सरगम अक्सर।

खयाल की सरगम अक्सर अदाओं को तराने देकर जाती है किनारों को कदमों की सौगात मुस्कान दिलाती है उजालों को सुबह दिलाती है।

खयाल की सरगम अक्सर दास्तानों को इशारे देकर जाती है एहसासों को जज्बातों की पुकार कोशिश दिलाती है लम्हों को सुबह दिलाती है।

खयाल की सरगम अक्सर अरमानों को अफसाने देकर जाती है इरादों को अंदाजों की सोच तलाश दिलाती है कदमों को सुबह दिलाती है।

खयाल की सरगम अक्सर नजारों को उम्मीदे देकर जाती है आशाओं को बदलावों की पहचान आस दिलाती है अल्फाजों को सुबह दिलाती है।

खयाल की सरगम अक्सर सपनों को दास्ताने देकर जाती है नजारों को दिशाओं की महफिल कहानी दिलाती है लहरों को सुबह दिलाती है।

खयाल की सरगम अक्सर एहसासों को अंदाजे देकर जाती है धाराओं को आवाजों की‌ धून पुकार दिलाती है अरमानों को सुबह दिलाती है।

खयाल की सरगम अक्सर अल्फाजों को इरादे देकर जाती है अंदाजों को अदाओं की रोशनी सोच दिलाती है जज्बातों को सुबह दिलाती है।

खयाल की सरगम अक्सर दिशाओं को नजारे देकर जाती है धाराओं को किनारों की कोशिश परख दिलाती है अफसानों को सुबह दिलाती है।

खयाल‌ की सरगम अक्सर तरानों को लम्हे देकर जाती है बदलावों को कदमों की अहमियत सपना दिलाती है तरानों को सुबह दिलाती है।

खयाल‌ की सरगम अक्सर आशाओं को सपने देकर जाती है इशारों को उजालों की तलाश एहसास दिलाती है राहों को सुबह दिलाती है।


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