Sunday, 18 October 2026

कविता. ६०१५ उजालों की सुबह संग।


                          उजालों की सुबह संग।

उजालों की सुबह संग आशाओं से तलाश इशारा देकर जाती है अरमानों को लम्हों की रोशनी सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की सुबह संग राहों से पहचान खयाल देकर जाती है जज्बातों को बदलावों की उमंग सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की सुबह संग तरानों से कोशिश सपना देकर जाती है एहसासों को इशारों की आहट सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की सुबह संग कदमों से आस अंदाज देकर जाती है अफसानों को किनारों की कहानी सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की सुबह संग धाराओं से लहर अल्फाज देकर जाती है दास्तानों को नजारों की मुस्कान सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की सुबह संग‌ जज्बातों से पुकार बदलाव देकर जाती है कदमों को अदाओं की कोशिश सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की सुबह संग दास्तानों से समझ कहानी देकर जाती है खयालों को सपनों की अहमियत सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की सुबह संग अंदाजों से सौगात सोच देकर जाती है आवाजों को उम्मीदों की आहट सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की सुबह संग दिशाओं से लहर‌ परख देकर जाती है इशारों को अल्फाजों की मुस्कान सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की सुबह संग अदाओं से उम्मीद तराना देकर जाती है नजारों को बदलावों की दास्तान सरगम सुनाकर जाती है।

No comments:

Post a Comment

कविता. ६०१५ उजालों की सुबह संग।

                          उजालों की सुबह संग। उजालों की सुबह संग आशाओं से तलाश इशारा देकर जाती है अरमानों को लम्हों की रोशनी सरगम सुनाकर जात...