Wednesday, 21 October 2026

कविता. ६०१८ किनारों से सरगम संग।

                             किनारों से सरगम संग।

किनारों से सरगम संग आवाजों की तरंग तलाश दिलाती है आशाओं को अंदाजों की पहचान रोशनी दिलाती है खयालों की धून दिलाती है।

किनारों से सरगम संग दास्तानों की सोच पुकार दिलाती है नजारों को दिशाओं की कहानी अफसाना दिलाती है लहरों की धून दिलाती है।

किनारों से सरगम संग तरानों की आहट जज्बात दिलाती है इशारों को उजालों की सुबह एहसास दिलाती है कदमों की धून दिलाती है।

किनारों से सरगम संग अरमानों की रोशनी अंदाज दिलाती है धाराओं को नजारों की आस कोशिश दिलाती है तरानों की धून दिलाती है।

किनारों से सरगम संग अंदाजों की आस दास्तान दिलाती है सपनों को अल्फाजों की दुनिया इरादा दिलाती है बदलावों की धून दिलाती है।

किनारों से सरगम संग राहों की पहचान अफसाना दिलाती है दास्तानों को जज्बातों की पुकार आवाज दिलाती है दिशाओं की धून दिलाती है।

किनारों से सरगम संग लहरों की मुस्कान तराना दिलाती है अदाओं को एहसासों की समझ कोशिश दिलाती है लहरों की धून दिलाती है।

किनारों से सरगम संग सपनों की दुनिया इरादा दिलाती है तरानों को बदलावों की आस तलाश दिलाती है इरादों की धून दिलाती है।

किनारों से सरगम संग अल्फाजों की उमंग पहचान दिलाती है जज्बातों को इशारों की पहचान सपना दिलाती है अंदाजों की धून दिलाती है।

किनारों से सरगम संग नजारों की आहट अरमान दिलाती है उम्मीदों को धाराओं की सौगात तराना दिलाती है लम्हों की धून दिलाती है।



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कविता. ६०१८ किनारों से सरगम संग।

                             किनारों से सरगम संग। किनारों से सरगम संग आवाजों की तरंग तलाश दिलाती है आशाओं को अंदाजों की पहचान रोशनी दिलाती ह...