Monday, 12 October 2026

कविता. ६००९ दिशाओं की महफिल संग।

                             दिशाओं की महफिल संग।

दिशाओं की महफिल संग इशारों से सरगम तलाश दिलाती है लहरों को खयालों की कहानी एहसास दिलाती है धाराओं को नजारा दिलाती है।

दिशाओं की महफिल संग तरानों से आस पहचान दिलाती है आशाओं को अंदाजों की रोशनी अरमान दिलाती है राहों को नजारा दिलाती है।

दिशाओं की महफिल संग आवाजों से पुकार मुस्कान दिलाती है किनारों को कदमों की आस सपना दिलाती है अफसानों को नजारा दिलाती है।

दिशाओं की महफिल संग अरमानों से कोशिश उजाला दिलाती है आवाजों को धाराओं की उमंग तलाश दिलाती है कदमों को नजारा दिलाती है।

दिशाओं की महफिल संग लहरों से सोच अल्फाज दिलाती है अफसानों को बदलावों की राह‌ सुबह दिलाती है तरानों को नजारा दिलाती है।

दिशाओं की महफिल संग एहसासों से सौगात परख दिलाती है बदलावों को सपनों की आहट मुस्कान दिलाती है लम्हों को नजारा दिलाती है।

दिशाओं की महफिल संग‌ उम्मीदों से समझ पहचान दिलाती है अरमानों को दास्तानों की राह कोशिश दिलाती है अल्फाजों को नजारा दिलाती है।

दिशाओं की महफिल संग‌ कदमों से तलाश किनारा दिलाती है इरादों को कदमों की सौगात पहचान दिलाती है आशाओं को नजारा दिलाती है।

दिशाओं की महफिल संग धाराओं से उम्मीद सरगम दिलाती है दास्तानों को किनारों की सुबह लम्हा दिलाती है सपनों को नजारा दिलाती है।

दिशाओं की महफिल संग राहों से सुबह आवाज दिलाती है जज्बातों को बदलावों की सोच उमंग दिलाती है अदाओं को नजारा दिलाती है।

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कविता. ६०११ मुस्कान की सरगम से।

                           मुस्कान की सरगम से। मुस्कान की सरगम से किनारों संग पुकार खयाल दिलाती है आवाजों को लम्हों की कहानी अरमान दिलाती है...