Thursday, 5 November 2026

कविता. ६०३३ किनारों पर सपनों की।

                             किनारों पर सपनों की।

किनारों पर सपनों की आहट अक्सर एहसास दिलाती है अरमानों को लम्हों की सुबह इशारा दिलाती है कदमों को मुस्कान दिलाती है।

किनारों पर सपनों की पुकार अक्सर तलाश दिलाती है दास्तानों को नजारों की सोच अफसाना दिलाती है आशाओं को मुस्कान दिलाती है।

किनारों पर सपनों की सरगम अक्सर सौगात दिलाती है बदलावों को उम्मीदों की आस एहसास दिलाती है तरानों को मुस्कान दिलाती है।

किनारों पर सपनों की रोशनी अक्सर खयाल दिलाती है दिशाओं को अंदाजों की पुकार इशारा दिलाती है नजारों को मुस्कान दिलाती है।

किनारों पर सपनों की आवाज अक्सर अदा दिलाती है जज्बातों को इरादों की सरगम पहचान दिलाती है राहों को मुस्कान दिलाती है।

किनारों पर सपनों की परख अक्सर आवाज दिलाती है अल्फाजों को खयालों की उमंग रोशनी दिलाती है उजालों को मुस्कान दिलाती है।

किनारों पर सपनों की सोच अक्सर अहमियत दिलाती है तरानों को अफसानों की लहर नजारा दिलाती है धाराओं को मुस्कान दिलाती है।

किनारों पर सपनों की कोशिश अक्सर अंदाज दिलाती है इशारों को एहसासों की उम्मीद तलाश दिलाती है लम्हों को मुस्कान दिलाती है।

किनारों पर सपनों की समझ अक्सर अफसाना दिलाती है खयालों को आशाओं की महफिल पुकार दिलाती है अदाओं को मुस्कान दिलाती है।

किनारों पर सपनों की पहचान अक्सर उमंग दिलाती है आवाजों को धाराओं की समझ एहसास दिलाती है अंदाजों को मुस्कान दिलाती है।


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कविता. ६०३४ आशाओं संग जज्बात अक्सर।

                     आशाओं संग जज्बात अक्सर। आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग तलाश दिलाते है लम्हों को एहसासों की समझ सरगम सुनाकर उम्मीद दिलाती है...