Friday, 6 November 2026

कविता. ६०३४ आशाओं संग जज्बात अक्सर।

                     आशाओं संग जज्बात अक्सर।

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग तलाश दिलाते है लम्हों को एहसासों की समझ सरगम सुनाकर उम्मीद दिलाती है तरानों की रोशनी देकर जाती है।

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग कहानी दिलाते है किनारों को अंदाजों की पहचान सपना सुनाकर कोशिश दिलाती है राहों की रोशनी देकर जाती है।

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग पुकार दिलाते है दास्तानों को नजारों की आहट इशारा सुनाकर खयाल दिलाती है सपनों की रोशनी देकर जाती है।

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग कोशिश दिलाते है आवाजों को धाराओं की सरगम आस सुनाकर राह दिलाती है दिशाओं की रोशनी देकर जाती है।

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग उजाला दिलाते है उम्मीदों को अदाओं की धून पहचान सुनाकर मुस्कान दिलाती है लहरों की रोशनी देकर जाती है।

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग आवाज दिलाते है इरादों को अफसानों की सोच बदलाव सुनाकर खयाल दिलाती है धाराओं की रोशनी देकर जाती है। 

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग अंदाज दिलाते है अरमानों को कदमों की सौगात अहमियत सुनाकर अदा दिलाती है आवाजों की रोशनी देकर जाती है।

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग तराना दिलाते है नजारों को दिशाओं की महफिल उमंग सुनाकर सुबह दिलाती है इशारों की रोशनी देकर जाती है।

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग खयाल दिलाते है लहरों को अल्फाजों की दुनिया समझ सुनाकर आस दिलाती है नजारों की रोशनी देकर जाती है।

आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग बदलाव दिलाते है धाराओं को दास्तानों की कोशिश लहर सुनाकर मुस्कान दिलाती है अदाओं की रोशनी देकर जाती है। 


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कविता. ६०३४ आशाओं संग जज्बात अक्सर।

                     आशाओं संग जज्बात अक्सर। आशाओं संग जज्बात अक्सर अलग तलाश दिलाते है लम्हों को एहसासों की समझ सरगम सुनाकर उम्मीद दिलाती है...