Sunday, 29 January 2023

कविता. ४७०१. इशारों कि सौगात अक्सर।

                                  इशारों कि सौगात अक्सर।

इशारों कि सौगात अक्सर उजालों कि मुस्कान दिलाती है उम्मीदों को कदमों कि सोच एहसास देती है किनारों पर आवाजों कि धून दिलाती है।

इशारों कि सौगात अक्सर जज्बातों कि सोच दिलाती है लम्हों को खयालों कि समझ सरगम देती है अफसानों पर अरमानों कि धून दिलाती है।

इशारों कि सौगात अक्सर तरानों कि सुबह दिलाती है नजारों को दिशाओं कि कहानी बदलाव देती है कदमों पर एहसासों कि धून दिलाती है।

इशारों कि सौगात अक्सर राहों कि कोशिश दिलाती है दास्तानों को अदाओं कि परख रोशनी देती है किनारों पर अंदाजों कि धून दिलाती है।

इशारों कि सौगात अक्सर सपनों कि लहर दिलाती है दिशाओं को बदलावों कि सुबह तलाश देती है अल्फाजों पर जज्बातों कि धून दिलाती है।

इशारों कि सौगात अक्सर अदाओं कि परख दिलाती है लम्हों को लहरों कि सरगम सोच देती है आशाओं पर अरमानों कि धून दिलाती है।

इशारों कि सौगात अक्सर इरादों कि सुबह दिलाती है किनारों कि अंदाजों कि आस अल्फाज देती है कदमों पर उजालों कि धून दिलाती है।

इशारों कि सौगात अक्सर आशाओं कि लहर दिलाती है नजारों को दिशाओं कि कहानी कोशिश देती है राहों पर अफसानों कि धून दिलाती है।

इशारों कि सौगात अक्सर अंदाजों कि आस दिलाती है इरादों को नजारों कि पहचान परख देती है नजारों पर खयालों कि धून दिलाती है।

इशारों कि सौगात अक्सर कदमों कि आहट दिलाती है सपनों को अरमानों कि सुबह दास्तान देती है उम्मीदों पर आशाओं कि धून दिलाती है।

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