Tuesday, 8 September 2026

कविता. ५९७५ आवाजों की समझ अक्सर।

                          आवाजों की समझ अक्सर।

आवाजों की समझ अक्सर तलाश दिलाती है अरमानों को सपनों की सौगात मुस्कान दिलाती है किनारों की महफिल इरादा दिलाती है।

आवाजों की समझ अक्सर उजाला दिलाती है नजारों को दिशाओं की अहमियत कोशिश दिलाती है खयालों की महफिल इरादा दिलाती है।

आवाजों की समझ अक्सर जज्बात दिलाती है राहों को अंदाजों की पहचान बदलाव दिलाती है लहरों की महफिल इरादा दिलाती है।

आवाजों की समझ अक्सर आवाज दिलाती है धाराओं को अल्फाजों की सरगम रोशनी दिलाती है दिशाओं की महफिल इरादा दिलाती है।

आवाजों की समझ अक्सर पुकार दिलाती है तरानों को कदमों की आस अरमान दिलाती है उम्मीदों की महफिल इरादा दिलाती है।

आवाजों की समझ अक्सर सरगम दिलाती है अल्फाजों को लम्हों की कहानी तलाश दिलाती है तरानों की महफिल इरादा दिलाती है।

आवाजों की समझ अक्सर दास्तान दिलाती है एहसासों को अदाओं की सरगम आस दिलाती है जज्बातों की महफिल इरादा दिलाती है।

आवाजों की‌‌ समझ अक्सर सोच दिलाती है खयालों को लहरों की पुकार नजारा दिलाती है इशारों की महफिल इरादा दिलाती है।

आवाजों की समझ अक्सर आहट दिलाती है तरानों को बदलावों की धून अंदाज दिलाती है अदाओं की महफिल इरादा दिलाती है।

आवाजों की समझ अक्सर उमंग दिलाती है कदमों को अंदाजों की लहर तराना दिलाती है धाराओं की महफिल इरादा‌‌ दिलाती है।

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कविता. ५९७५ आवाजों की समझ अक्सर।

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