Saturday, 15 February 2025

कविता. ५४१९. जज्बात की राह अक्सर।

                             जज्बात की राह अक्सर।

जज्बात की राह अक्सर एहसास दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की आस अरमान सुनाती है नजारों को लम्हों की अहमियत दिलाती है।

जज्बात की राह अक्सर तलाश दिलाती है कदमों को बदलावों की उमंग दास्तान सुनाती है तरानों को इशारों की अहमियत दिलाती है।

जज्बात की राह अक्सर आवाज दिलाती है किनारों को लहरों की पुकार कोशिश सुनाती है आशाओं को लम्हों की अहमियत दिलाती है।

जज्बात की राह अक्सर अंदाज दिलाती है खयालों को नजारों की सौगात मुस्कान सुनाती है उम्मीदों को अल्फाजों की अहमियत दिलाती है।

जज्बात की राह अक्सर आस दिलाती है धाराओं को अंदाजों की समझ उजाला सुनाती है एहसासों को किनारों की अहमियत दिलाती है।

जज्बात की राह अक्सर तराना दिलाती है आवाजों को कदमों की पहचान उमंग सुनाती है अरमानों को आशाओं की अहमियत दिलाती है।

जज्बात की राह अक्सर कोशिश दिलाती है नजारों को दिशाओं की सोच अफसाना सुनाती है सपनों को दास्तानों की अहमियत दिलाती है।

जज्बात की राह अक्सर लहर दिलाती है सपनों को आशाओं की पहचान कोशिश सुनाती है इरादों को कदमों की अहमियत दिलाती है।

जज्बात की राह अक्सर उजाला दिलाती है उम्मीदों को अरमानों की सोच सौगात सुनाती है अंदाजों को खयालों की अहमियत दिलाती है।

जज्बात की राह अक्सर उमंग दिलाती है लहरों को दास्तानों की सरगम आस सुनाती है अदाओं को नजारों की अहमियत दिलाती है।

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