Wednesday, 10 December 2025

कविता. ५७१७. तरानों को बदलावों की।

                         तरानों को बदलावों की।

तरानों को बदलावों की आस अल्फाज सुनाती है अंदाजों की पहचान संग आशाओं के एहसास की उमंग अक्सर कदमों का उजाला देकर जाती है।

तरानों को बदलावों की रोशनी मुस्कान सुनाती है खयालों की पुकार संग किनारों के पहचान की आस अक्सर इशारों को उजाला देकर जाती है।

तरानों को बदलावों की कोशिश सरगम सुनाती है आवाजों की धून संग नजारों के आहट की उम्मीद अक्सर आशाओं को उजाला देकर जाती है।

तरानों को बदलावों की धारा पुकार सुनाती है दिशाओं की महफिल संग राहों के अरमान की रोशनी अक्सर उम्मीदों को उजाला देकर जाती है।

तरानों को बदलावों की परख खयाल‌‌ सुनाती है आशाओं की सुबह संग जज्बातों के लहर की मुस्कान अक्सर धाराओं को उजाला देकर जाती है।

तरानों को बदलावों की उमंग तलाश सुनाती है लम्हों की कहानी संग अंदाजों के कोशिश की अहमियत अक्सर राहों को उजाला देकर जाती है।

तरानों को बदलावों की समझ सोच सुनाती है राहों की आस संग इरादों के पहचान की आवाज अक्सर दिशाओं को उजाला देकर जाती है।

तरानों को बदलावों की आवाज दास्तान सुनाती है अदाओं की आहट संग धाराओं के सोच की सरगम अक्सर लम्हों को उजाला देकर जाती है।

तरानों को बदलावों की सौगात इशारा सुनाती है अरमानों की सरगम संग लहरों के अदाओं की धून अक्सर उम्मीदों को उजाला देकर जाती है।

तरानों को बदलावों की मुस्कान उम्मीद सुनाती है आवाजों की धून संग अफसानों के दास्तानों की सुबह अक्सर नजारों को उजाला देकर जाती है।

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