Monday, 29 December 2025

कविता. ५७३६. उजालों की रोशनी अक्सर।

                         उजालों की रोशनी अक्सर।

उजालों की रोशनी अक्सर एहसास सुनाती है तरानों को बदलावों की समझ संग आशाओं की महफिल अल्फाज सुनाती है।

उजालों की रोशनी अक्सर अरमान सुनाती है लहरों को कदमों की सुबह संग अंदाजों की पुकार अल्फाज सुनाती है।

उजालों की रोशनी अक्सर उमंग सुनाती है जज्बातों को उम्मीदों की सौगात संग आवाजों की धून अल्फाज सुनाती है।

उजालों की रोशनी अक्सर मुस्कान सुनाती है धाराओं को नजारों की आहट संग दास्तानों की सरगम अल्फाज सुनाती है।

उजालों की रोशनी अक्सर तराना सुनाती है इशारों को जज्बातों की पहचान संग दिशाओं की कहानी अल्फाज सुनाती है।

उजालों की रोशनी अक्सर सपना सुनाती है अरमानों को खयालों की कोशिश संग अफसानों की समझ अल्फाज सुनाती है।

उजालों की रोशनी अक्सर उम्मीद सुनाती है राहों को किनारों की पुकार संग एहसासों की परख अल्फाज सुनाती है।

उजालों की रोशनी अक्सर तलाश सुनाती है लम्हों को इरादों की धाराओं संग लहरों की कोशिश अल्फाज सुनाती है।

उजालों की रोशनी अक्सर दास्तान सुनाती है खयालों को दिशाओं‌ की पुकार संग जज्बातों की अहमियत अल्फाज सुनाती है।

उजालों की रोशनी अक्सर सरगम सुनाती है इरादों को राहों की पहचान संग नजारों की आहट अल्फाज सुनाती है।




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