Monday, 8 December 2025

कविता. ५७१५. अल्फाज से जुडकर।

                              अल्फाज से जुडकर।

अल्फाज से जुडकर कोशिश अक्सर आवाज सुनाती है उम्मीदों को दास्तानों की उमंग पहचान दिलाती है लम्हों की मुस्कान देकर जाती है।

अल्फाज से जुडकर आस अक्सर एहसास सुनाती है तरानों को अफसानों की सौगात तलाश दिलाती है दिशाओं की मुस्कान देकर जाती है।

अल्फाज से जुडकर रोशनी अक्सर खयाल सुनाती है आशाओं को बदलावों की सुबह उजाला दिलाती है तरानों की मुस्कान देकर जाती है।

अल्फाज से जुडकर अंदाज अक्सर अरमान सुनाती है इशारों को उजालों की सरगम सपना दिलाती है आवाजों की मुस्कान देकर जाती है।

अल्फाज से जुडकर लहर अक्सर तलाश सुनाती है खयालों को नजारों की पुकार अहमियत दिलाती है जज्बातों की मुस्कान देकर जाती है।

अल्फाज से जुडकर आहट अक्सर सुबह सुनाती है किनारों को उम्मीदों की सोच इरादा दिलाती है लहरों की मुस्कान देकर जाती है।

अल्फाज से जुडकर उमंग अक्सर आहट सुनाती है दास्तानों को लम्हों की कहानी उम्मीद दिलाती है राहों की मुस्कान देकर जाती है।

अल्फाज से जुडकर आवाज अक्सर धून सुनाती है उजालों को सपनों की कोशिश पहचान दिलाती है कदमों की मुस्कान देकर जाती है।

अल्फाज से जुडकर दास्तान अक्सर तराना सुनाती है कदमों को अरमानों की परख बदलाव दिलाती है अदाओं की मुस्कान देकर जाती है।

अल्फाज से जुडकर लहर अक्सर जज्बात सुनाती है आशाओं को अंदाजों की उम्मीद कोशिश दिलाती है बदलावों की मुस्कान देकर जाती है।

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