Sunday, 14 December 2025

कविता. ५७२१. नजारों को जज्बातों की।

                           नजारों को जज्बातों की।

नजारों को जज्बातों की सौगात तलाश दिलाती है अरमानों संग सोच अक्सर आवाज सुनाती है उजालों को अल्फाज सुनाती है।

नजारों को जज्बातों की रोशनी कोशिश दिलाती है अंदाजों संग पहचान अक्सर राह सुनाती है दिशाओं को अल्फाज सुनाती है।

नजारों को जज्बातों की कहानी बदलाव दिलाती है आशाओं संग परख अक्सर उमंग सुनाती है राहों को अल्फाज सुनाती है।

नजारों को जज्बातों की पुकार इशारा दिलाती है धाराओं संग सुबह अक्सर दास्तान सुनाती है अदाओं को अल्फाज सुनाती है।

नजारों को जज्बातों की आस एहसास दिलाती है आवाजों संग धून अक्सर पहचान सुनाती है लहरों को अल्फाज सुनाती है।

नजारों को जज्बातों की उमंग खयाल दिलाती है बदलावों संग सरगम अक्सर सपना सुनाती है आशाओं को अल्फाज सुनाती है।

नजारों को जज्बातों की लहर पहचान दिलाती है इरादों संग समझ अक्सर मुस्कान सुनाती है उम्मीदों को अल्फाज सुनाती है।

नजारों को जज्बातों की पुकार अरमान दिलाती है कदमों संग आहट अक्सर सौगात सुनाती है दास्तानों को अल्फाज सुनाती है।

नजारों को जज्बातों की समझ अंदाज दिलाती है तरानों संग रोशनी अक्सर खयाल सुनाती है किनारों को अल्फाज सुनाती है।

नजारों को जज्बातों की अहमियत कहानी दिलाती है खयालों संग आवाज अक्सर धून सुनाती है एहसासों को अल्फाज सुनाती है।

No comments:

Post a Comment

कविता. ५७९८. हर उजियारा कोई।

                               हर उजियारा कोई। हर उजियारा कोई कहानी देता है किनारों से जुडकर मुस्कान की निशानी देता है और लम्हों संग अल्फाजो...