Tuesday, 23 December 2025

कविता. ५७३०. राहों की रोशनी से।

                              राहों की रोशनी से।

राहों की रोशनी से धाराओं की सौगात पुकार दिलाती है आवाजों की धून अक्सर एहसासों को जज्बात‌ दिलाती है।

राहों की रोशनी से अंदाजों की पहचान बदलाव दिलाती है इशारों की आहट अक्सर अरमानों को जज्बात दिलाती है।

राहों की रोशनी से अल्फाजों की दुनिया कोशिश दिलाती है तरानों की सरगम अक्सर दिशाओं को जज्बात दिलाती है।

राहों की रोशनी से कदमों की आस दास्तान दिलाती है अफसानों की सौगात अक्सर इशारों को जज्बात दिलाती है।

राहों की रोशनी से किनारों की मुस्कान तलाश दिलाती है उजालों की अहमियत अक्सर लहरों को जज्बात दिलाती है।

राहों की रोशनी से अफसानों की पुकार इरादा दिलाती है एहसासों की उम्मीद अक्सर बदलावों को जज्बात दिलाती है।

राहों की रोशनी से नजारों की आवाज उमंग दिलाती है अरमानों की पहचान अक्सर कदमों को जज्बात दिलाती है।

राहों की रोशनी से तरानों की आस मुस्कान दिलाती है बदलावों की कोशिश अक्सर खयालों को जज्बात दिलाती है।

राहों की रोशनी से अरमानों की सुबह पहचान दिलाती है अंदाजों की आस अक्सर आशाओं को जज्बात दिलाती है।

राहों की रोशनी से नजारों की अहमियत खयाल दिलाती है लम्हों की कहानी अक्सर दास्तानों को जज्बात दिलाती है।


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