Friday, 12 December 2025

कविता. ५७१९. किनारों को कदमों की।

                           किनारों को कदमों की।

किनारों को कदमों की सौगात पहचान दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की दुनिया उमंग सुनाकर सरगम सुनाती है।

किनारों को कदमों की पुकार अहमियत दिलाती है आशाओं को बदलावों की आस तलाश सुनाकर सोच सुनाती है।

किनारों को कदमों की कहानी अफसाना दिलाती है इरादों को एहसासों की दास्तान तराना सुनाकर उम्मीद सुनाती है।

किनारों को कदमों की राह दास्तान दिलाती है अंदाजों को नजारों की आहट अहमियत सुनाकर सपना सुनाती है।

किनारों को कदमों की आवाज जज्बात दिलाती है खयालों को राहों की सोच पहचान सुनाकर अरमान सुनाती है।

किनारों को कदमों की लहर तलाश दिलाती है जज्बातों को दिशाओं की महफिल सुबह सुनाकर आवाज सुनाती है।

किनारों को कदमों की परख इरादा दिलाती है धाराओं को तरानों की सरगम अहमियत सुनाकर अल्फाज सुनाती है।

किनारों को कदमों की समझ कोशिश दिलाती है उजालों को सपनों की सौगात रोशनी सुनाकर अंदाज सुनाती है।

किनारों को कदमों की तलाश मुस्कान दिलाती है लहरों को खयालों की कोशिश एहसास सुनाकर पुकार सुनाती है।

किनारों को कदमों की महफिल इशारा दिलाती है अरमानों को अदाओं की पुकार सहारा सुनाकर बदलाव सुनाती है।



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