Tuesday, 15 September 2026

कविता. ५९८२ लम्हों से सोच की कहानी संग।

                       लम्हों से सोच की कहानी संग।

लम्हों से सोच की कहानी संग आशाओं की महफिल तलाश दिलाती है जज्बातों को बदलावों की पुकार अक्सर सरगम सुनाती है।

लम्हों से सोच की कहानी संग नजारों की कोशिश खयाल दिलाती है अरमानों को लहरों की सौगात अक्सर सरगम सुनाती है।

लम्हों से सोच की कहानी संग धाराओं की समझ आवाज दिलाती है तरानों को अफसानों की उमंग अक्सर सरगम सुनाती है।

लम्हों से सोच की कहानी संग अंदाजों की आस दास्तान दिलाती है लहरों को सपनों की अहमियत अक्सर सरगम सुनाती है।

लम्हों से सोच की कहानी संग तरानों की आहट उम्मीद दिलाती है अल्फाजों को राहों की सौगात अक्सर सरगम सुनाती है।

लम्हों से सोच की कहानी संग अरमानों की मुस्कान आस दिलाती है दास्तानों को धाराओं की पहचान अक्सर सरगम सुनाती है।

लम्हों से सोच की कहानी संग दिशाओं की रोशनी परख दिलाती है किनारों को एहसासों की सुबह अक्सर सरगम सुनाती है।

लम्हों से सोच की कहानी संग अदाओं की पहचान आवाज दिलाती है अंदाजों को इशारों की कोशिश अक्सर सरगम सुनाती है।

लम्हों से सोच की कहानी संग किनारों की आहट तलाश दिलाती है खयालों को दास्तानों की आवाज अक्सर सरगम सुनाती है।

लम्हों से सोच की कहानी संग जज्बातों की राह अल्फाज दिलाती है इरादों को दिशाओं की समझ अक्सर सरगम सुनाती है। 

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कविता. ५९८२ लम्हों से सोच की कहानी संग।

                       लम्हों से सोच की कहानी संग। लम्हों से सोच की कहानी संग आशाओं की महफिल तलाश दिलाती है जज्बातों को बदलावों की पुकार अक्...