Wednesday, 12 March 2025

कविता. ५४४४. कोशिश संग जज्बातों की।

                        कोशिश संग जज्बातों की।

कोशिश संग जज्बातों की रोशनी दिलाती है लहरों को खयालों की सरगम उजाला दिलाती है दिशाओं का तराना दिलाती है।

कोशिश संग जज्बातों की आवाज दिलाती है एहसासों को कदमों की पुकार पहचान दिलाती है उम्मीदों का तराना‌ दिलाती है।

कोशिश संग जज्बातों की अंदाज दिलाती है आशाओं को बदलावों की आस अरमान दिलाती है राहों का तराना दिलाती है।

कोशिश संग जज्बातों की मुस्कान दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की दुनिया दास्तान दिलाती है सपनों का तराना दिलाती है।

कोशिश संग जज्बातों की अफसाना दिलाती है इरादों को किनारों की सुबह अल्फाज दिलाती है कदमों का तराना दिलाती है।

कोशिश संग जज्बातों की उमंग दिलाती है आवाजों को धाराओं की समझ एहसास दिलाती है खयालों का तराना दिलाती है।

कोशिश संग जज्बातों की सोच दिलाती है नजारों को लम्हों की अहमियत लहर दिलाती है अरमानों का तराना दिलाती है।

कोशिश संग जज्बातों की सौगात दिलाती है कदमों को अल्फाजों की दुनिया इशारा दिलाती है अदाओं का तराना दिलाती है।

कोशिश संग जज्बातों की पुकार दिलाती है अफसानों को सपनों की रोशनी दास्तान दिलाती है इरादों का तराना दिलाती है।

कोशिश संग जज्बातों की उमंग दिलाती है किनारों को बदलावों की पुकार आवाज दिलाती है कदमों का तराना दिलाती है।

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