Thursday, 27 March 2025

कविता. ५४५९. लम्हों को अल्फाजों की।

                          लम्हों को अल्फाजों की।

लम्हों को अल्फाजों की दुनिया उजाला दिलाती है इशारों को बदलावों की आस कोशिश देकर जाती है अंदाजों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की अदा उम्मीद दिलाती है अरमानों को नजारों की आहट पहचान देकर जाती है कदमों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की सुबह इशारा दिलाती है आशाओं को खयालों की सोच अफसाना देकर जाती है दिशाओं की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की आवाज कोशिश दिलाती है तरानों को अरमानों की समझ दास्तान देकर जाती है किनारों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की अंदाज उमंग दिलाती है खयालों को जज्बातों की सौगात तलाश देकर जाती है सपनों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की सरगम आस दिलाती है इरादों को कदमों की लहर अफसाना देकर जाती है आशाओं की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की समझ आवाज दिलाती है इरादों को अरमानों की पहचान सौगात देकर‌ जाती है अंदाजों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की कोशिश अरमान दिलाती है उजालों को किनारों की मुस्कान नजारा देकर जाती है अफसानों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की राह पहचान दिलाती है तरानों को इशारों की सरगम एहसास देकर जाती है आवाजों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की दास्तान परख दिलाती है नजारों को दिशाओं की दुनिया बदलाव देकर जाती है उजालों की रोशनी दिलाती है।

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