Wednesday, 1 April 2026

कविता. ५८२९. तरानों की सरगम संग।

                           तरानों की सरगम संग।

तरानों की सरगम संग आशाओं की महफिल रोशनी दिलाती है अफसानों की सोच से जज्बातों की पुकार कोशिश दिलाती है।

तरानों की सरगम संग कदमों की सौगात बदलाव दिलाती है किनारों की मुस्कान से एहसासों की राह कोशिश दिलाती है।

तरानों की सरगम संग आवाजों की उमंग अरमान दिलाती है नजारों की आहट से इशारों की पहचान कोशिश दिलाती है।

तरानों की सरगम संग उजालों की समझ तलाश दिलाती है दास्तानों की सुबह से अरमानों की सोच कोशिश दिलाती है।

तरानों की सरगम संग दिशाओं की कहानी अफसाना दिलाती है उम्मीदों की सौगात से बदलावों की लहर कोशिश दिलाती है।

तरानों की सरगम संग अंदाजों की आस अहमियत दिलाती है धाराओं की पुकार से अल्फाजों की राह कोशिश दिलाती है।

तरानों की सरगम संग उम्मीदों की परख खयाल दिलाती है कदमों की आस से इरादों की सुबह कोशिश दिलाती है।

तरानों की सरगम संग नजारों की अदा आवाज दिलाती है अंदाजों की पहचान से लहरों की तलाश कोशिश दिलाती है।

तरानों की सरगम संग जज्बातों की उमंग समझ दिलाती है इरादों की पुकार से आशाओं की महफिल कोशिश दिलाती है।

तरानों की सरगम संग अरमानों की सोच सपना दिलाती है खयालों की समझ से एहसासों की उम्मीद कोशिश दिलाती है।



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