Thursday, 2 April 2026

कविता. ५८३०. अल्फाजों को राहों की।

                            अल्फाजों को राहों की।

अल्फाजों को राहों की रोशनी उजाला दिलाती है लम्हों को किनारों की सरगम उम्मीद सुनाती है अदाओं को दास्तान दिलाती है।

अल्फाजों को राहों की उमंग अरमान दिलाती है जज्बातों को बदलावों की आस मुस्कान सुनाती है किनारों को दास्तान दिलाती है।

अल्फाजों को राहों की पुकार पहचान दिलाती है अरमानों को कदमों की सौगात कोशिश सुनाती है आशाओं को दास्तान दिलाती है।

अल्फाजों को राहों की आवाज नजारा दिलाती है अंदाजों को सपनों की आहट तराना सुनाती है अफसानों को दास्तान दिलाती है।

अल्फाजों को राहों की लहर बदलाव दिलाती है खयालों को दिशाओं की समझ सोच सुनाती है नजारों को दास्तान दिलाती है।

अल्फाजों को राहों की अहमियत उमंग दिलाती है इशारों को लहरों की पहचान आस सुनाती है इरादों को दास्तान दिलाती है।

अल्फाजों को राहों की सौगात तलाश दिलाती है कदमों को अरमानों की सोच इशारा सुनाती है दिशाओं को दास्तान दिलाती है।

अल्फाजों को राहों की कोशिश कहानी दिलाती है खयालों को नजारों की आहट उम्मीद सुनाती है तरानों को दास्तान दिलाती है।

अल्फाजों को राहों की परख बदलाव दिलाती है आशाओं को किनारों की सुबह जज्बात सुनाती है एहसासों को दास्तान दिलाती है।

अल्फाजों को राहों की तलाश सहारा दिलाती है लम्हों को खयालों की सोच आहट सुनाती है उम्मीदों को दास्तान दिलाती है।


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कविता. ५८३०. अल्फाजों को राहों की।

                            अल्फाजों को राहों की। अल्फाजों को राहों की रोशनी उजाला दिलाती है लम्हों को किनारों की सरगम उम्मीद सुनाती है अदाओ...