Friday, 10 April 2026

कविता. ५८३८. दिशाओं की महफिल से।

                         दिशाओं की महफिल से।

दिशाओं की महफिल से आशाओं संग कहानी तलाश दिलाती है किनारों को अरमानों की समझ अक्सर अल्फाज दिलाती है।

दिशाओं की महफिल से जज्बातों संग सरगम सुबह दिलाती है एहसासों को उजालों की रोशनी अक्सर अल्फाज दिलाती है।

दिशाओं की महफिल से दास्तानों संग उमंग खयाल दिलाती है इशारों को आवाजों की धून अक्सर अल्फाज दिलाती है।

दिशाओं की महफिल से नजारों संग सुबह सपना दिलाती है लहरों को खयालों की अहमियत अक्सर अल्फाज दिलाती है।

दिशाओं की महफिल से अदाओं संग कोशिश सौगात दिलाती है अंदाजों को धाराओं की सोच अक्सर अल्फाज दिलाती है।

दिशाओं की महफिल से कदमों संग पहचान इशारा दिलाती है उम्मीदों को तरानों की तलाश अक्सर अल्फाज दिलाती है।

दिशाओं की महफिल से राहों संग आवाज मुस्कान ‌दिलाती है लम्हों को खयालों की आस अक्सर अल्फाज दिलाती है।

दिशाओं की महफिल से सपनों संग आहट दास्तान दिलाती है अफसानों को अदाओं की पुकार अक्सर अल्फाज दिलाती है।

दिशाओं की महफिल से इशारों संग बदलाव तराना‌ दिलाती है दास्तानों को लहरों की उमंग अक्सर अल्फाज दिलाती है।

दिशाओं की महफिल से अंदाजों संग परख‌ उम्मीद दिलाती है अदाओं को आवाजों की आहट अक्सर अल्फाज दिलाती है।

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कविता. ५८३८. दिशाओं की महफिल से।

                         दिशाओं की महफिल से। दिशाओं की महफिल से आशाओं संग कहानी तलाश दिलाती है किनारों को अरमानों की समझ अक्सर अल्फाज दिलाती...