Friday, 17 April 2026

कविता. ५८४५. सपनों की पुकार संग।

                              सपनों की पुकार संग।

सपनों की पुकार संग अरमानों से उम्मीद तलाश दिलाती है एहसासों की कोशिश जज्बात दिलाती है आशाओं की महफिल दिलाती है।

सपनों की पुकार संग इशारों से आवाज धून दिलाती है बदलावों की आहट अहमियत दिलाती है लहरों की महफिल दिलाती है‌।

सपनों की पुकार संग किनारों से तलाश इरादा दिलाती है अफसानों की रोशनी दास्तान दिलाती है खयालों की महफिल दिलाती है।

सपनों की पुकार संग अदाओं से पहचान अल्फाज दिलाती है कदमों की सौगात आवाज दिलाती है दिशाओं की महफिल दिलाती है।

सपनों की पुकार संग जज्बातों से सोच तराना दिलाती है खयालों की सरगम कोशिश दिलाती है अरमानों की महफिल दिलाती है।

सपनों की पुकार संग नजारों से आस इरादा दिलाती है अंदाजों की मुस्कान एहसास दिलाती है किनारों की महफिल दिलाती है।

सपनों की पुकार संग दिशाओं से आहट सपना दिलाती है उजालों की सुबह नजारा दिलाती है कदमों की महफिल दिलाती है।

सपनों की पुकार संग एहसासों से राह कोशिश दिलाती है आवाजों की धून नजारा दिलाती है लम्हों की महफिल दिलाती है।

सपनों की पुकार संग अंदाजों से मुस्कान उमंग दिलाती है इरादों की राह अहमियत दिलाती है अदाओं की महफिल दिलाती है।

सपनों की पुकार संग तरानों से पहचान आस दिलाती है बदलावों की रोशनी अल्फाज दिलाती है इशारों की महफिल दिलाती है।

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कविता. ५८४५. सपनों की पुकार संग।

                              सपनों की पुकार संग। सपनों की पुकार संग अरमानों से उम्मीद तलाश दिलाती है एहसासों की कोशिश जज्बात दिलाती है आशाओ...