Sunday, 20 September 2026

कविता. ५९८७ आशाओं की महफिल अक्सर।


              आशाओं की महफिल अक्सर।

आशाओं की महफिल अक्सर तलाश दिलाती है उजालों को सपनों की अहमियत एहसास दिलाती है लम्हों को इरादा देकर जाती है।

आशाओं की महफिल अक्सर लहर दिलाती है दिशाओं को कदमों की पुकार अफसाना दिलाती है राहों को इरादा देकर जाती है।

आशाओं की महफिल अक्सर मुस्कान दिलाती है खयालों को दास्तानों की सुबह जज्बात दिलाती है किनारों को इरादा देकर जाती है।

आशाओं की महफिल अक्सर अंदाज दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की पहचान बदलाव दिलाती है तरानों को इरादा देकर जाती है।

आशाओं की महफिल अक्सर कोशिश दिलाती है दिशाओं को आवाजों की धून अरमान दिलाती है इशारों को इरादा देकर जाती है।

आशाओं की महफिल अक्सर दास्तान दिलाती है एहसासों को तरानों की आस आहट दिलाती है नजारों को इरादा देकर जाती है।

आशाओं की महफिल अक्सर आवाज दिलाती है खयालों को सपनों की सोच सरगम दिलाती है अरमानों को इरादा देकर जाती है।

आशाओं की महफिल अक्सर रोशनी दिलाती है अंदाजों को उम्मीदों की सौगात खयाल दिलाती है अदाओं को इरादा देकर जाती है।

आशाओं की महफिल अक्सर नजारा दिलाती है धाराओं को जज्बातों की समझ बदलाव दिलाती है कदमों को इरादा देकर जाती है।

आशाओं की महफिल अक्सर सोच दिलाती है तरानों को अफसानों की रोशनी अहमियत दिलाती है लहरों को इरादा देकर जाती है।

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कविता. ५९८७ आशाओं की महफिल अक्सर।

              आशाओं की महफिल अक्सर। आशाओं की महफिल अक्सर तलाश दिलाती है उजालों को सपनों की अहमियत एहसास दिलाती है लम्हों को इरादा देकर जाती ...