Tuesday, 10 February 2026

कविता. ५७७९. राहों को अरमानों संग।

                             राहों को अरमानों संग।

राहों को अरमानों संग पहचान अक्सर उमंग सुनाती है उजालों की सुबह से आशाओं की महफिल अफसाना देकर जाती है।

राहों को अरमानों संग कोशिश अक्सर जज्बात सुनाती है तरानों की आस से इरादों की तलाश अफसाना देकर जाती है।

राहों को अरमानों संग परख अक्सर लहर सुनाती है धाराओं की कहानी से दिशाओं की अहमियत अफसाना देकर जाती है।

राहों को अरमानों संग आहट अक्सर आवाज सुनाती है लम्हों की सोच से किनारों की सरगम अफसाना देकर जाती है।

राहों को अरमानों संग दास्तान अक्सर उम्मीद सुनाती है आशाओं की अदा से अंदाजों की रोशनी अफसाना देकर जाती है।

राहों को अरमानों संग समझ अक्सर तलाश सुनाती है आवाजों की धून से अल्फाजों की सोच अफसाना देकर जाती है।

राहों को अरमानों संग एहसास अक्सर पुकार सुनाती है जज्बातों की सौगात से लम्हों की कहानी अफसाना देकर जाती है।

राहों को अरमानों संग सोच अक्सर सपना सुनाती है नजारों की तलाश से लहरों की उम्मीद अफसाना देकर जाती है।

राहों को अरमानों संग रोशनी अक्सर मुस्कान सुनाती है दास्तानों की समझ से धाराओं की आस अफसाना देकर जाती है।

राहों को अरमानों संग तलाश अक्सर इशारा सुनाती है दिशाओं की कोशिश से जज्बातों की आवाज अफसाना देकर जाती है।

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