Thursday, 26 February 2026

कविता. ५७९५. उजालों की सोच संग।

                             उजालों की सोच संग।

उजालों की सोच संग आशाओं से एहसास की पहचान इशारा दिलाती है कदमों की सुबह से दास्तानों की समझ दिलाती है।

उजालों की सोच संग अल्फाजों से उम्मीद की आहट लहर दिलाती है किनारों की सरगम से जज्बातों की समझ दिलाती है।

उजालों की सोच संग राहों से‌ आवाज की धून तलाश दिलाती है अफसानों की रोशनी से लम्हों की समझ दिलाती है।

उजालों की सोच संग दिशाओं से कोशिश की कश्ती अरमान दिलाती है तरानों की पुकार से खयालों की समझ दिलाती है।

उजालों की सोच संग जज्बातों से उमंग की परख अल्फाज दिलाती है दिशाओं की अहमियत से सपनों की समझ दिलाती है।

उजालों की सोच संग अंदाजों से आस की मुस्कान आवाज दिलाती है इशारों की परख से नजारों की समझ दिलाती है।

उजालों की सोच संग अरमानों से राह की कहानी लहर दिलाती है एहसासों की उमंग से आशाओं की समझ दिलाती है।

उजालों की सोच संग इशारों से आहट की कोशिश बदलाव दिलाती है खयालों की मुस्कान से धाराओं की समझ दिलाती है।

उजालों की सोच संग‌ तरानों से पहचान की पुकार तलाश दिलाती है धाराओं की आवाज से अंदाजों की समझ दिलाती है।

उजालों की सोच संग किनारों से महफिल की सुबह अफसाना दिलाती है आशाओं की तलाश से बदलावों की समझ दिलाती है।

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