Wednesday, 11 February 2026

कविता. ५७८०. किनारों की सुबह हर पल।

                         किनारों की सुबह हर पल।

किनारों की सुबह हर‌ पल‌ उम्मीद सुनाती है दिशाओं को लहरों की मुस्कान कहानी देकर जाती है जज्बातों को इशारा दिलाती है।

किनारों की सुबह हर पल सरगम सुनाती है अंदाजों को सपनों की सौगात तलाश देकर जाती है आशाओं को इशारा दिलाती है।

किनारों की सुबह हर पल आवाज सुनाती है अल्फाजों को कदमों की आस रोशनी देकर जाती है बदलावों को इशारा दिलाती है।

किनारों की सुबह हर पल दास्तान सुनाती है नजारों को दिशाओं की महफिल अंदाज देकर जाती है राहों को इशारा दिलाती है।

किनारों की सुबह हर‌ पल‌ अफसाना सुनाती है अदाओं को खयालों की कोशिश उमंग देकर जाती है सपनों को इशारा दिलाती है।

किनारों की सुबह हर‌ पल‌ सोच सुनाती है एहसासों को आशाओं की अहमियत अरमान देकर जाती है तरानों को इशारा दिलाती है।

किनारों की सुबह हर पल पहचान सुनाती है लम्हों को अल्फाजों की समझ खयाल देकर जाती है उम्मीदों को इशारा दिलाती है।

किनारों की सुबह हर पल आस सुनाती है उजालों को अंदाजों की पुकार लहर देकर जाती है अरमानों को इशारा दिलाती है।

किनारों की सुबह हर‌ पल पुकार सुनाती है दास्तानों को लम्हों की आवाज रोशनी देकर जाती है कदमों को इशारा दिलाती है।

किनारों की सुबह हर पल अंदाज सुनाती है राहों को खयालों की पहचान उजाला देकर जाती है धाराओं को इशारा दिलाती है।

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कविता. ५७८०. किनारों की सुबह हर पल।

                         किनारों की सुबह हर पल। किनारों की सुबह हर‌ पल‌ उम्मीद सुनाती है दिशाओं को लहरों की मुस्कान कहानी देकर जाती है जज्बा...