Wednesday, 18 February 2026

कविता. ५७८७. उजालों की सुबह से।

                            उजालों की सुबह से।

उजालों की सुबह से दास्तानों मे उम्मीद दिलाती है लहरों को खयालों की सरगम पहचान दिलाती है तरानों की कोशिश दिलाती है।

उजालों की सुबह से जज्बातों मे आवाज दिलाती है इशारों को अरमानों की सोच बदलाव दिलाती है अदाओं को कोशिश दिलाती है।

उजालों की सुबह से धाराओं मे अंदाज दिलाती है किनारों को सपनों की रोशनी इशारा दिलाती है राहों को कोशिश दिलाती है।

उजालों की सुबह से एहसासों मे अल्फाज दिलाती है नजारों को दिशाओं की महफिल उमंग दिलाती है आशाओं को कोशिश दिलाती है।

उजालों की सुबह से अफसानों मे तलाश दिलाती है जज्बातों को बदलावों की आस अहमियत दिलाती है अंदाजों को कोशिश दिलाती है।

उजालों की सुबह से लम्हों मे अरमान दिलाती है राहों को अल्फाजों की सौगात तलाश दिलाती है सपनों को कोशिश दिलाती है।

उजालों की सुबह से कदमों मे इशारा दिलाती है धाराओं को आशाओं की परख पुकार दिलाती है दिशाओं को कोशिश दिलाती है।

उजालों की सुबह से सपनों मे सोच दिलाती है इशारों को अंदाजों की समझ एहसास दिलाती है कदमों को कोशिश दिलाती है।

उजालों की सुबह से अरमानों मे सौगात दिलाती है राहों को इरादों की पहचान खयाल दिलाती है अफसानों को कोशिश दिलाती है।

उजालों की सुबह से कदमों मे पुकार दिलाती है सपनों को अल्फाजों की दुनिया मुस्कान दिलाती है उम्मीदों को कोशिश दिलाती है।


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कविता. ५७८७. उजालों की सुबह से।

                            उजालों की सुबह से। उजालों की सुबह से दास्तानों मे उम्मीद दिलाती है लहरों को खयालों की सरगम पहचान दिलाती है तरानो...