Thursday, 19 February 2026

कविता. ५७८८. तरानों को एहसास की।

                             तरानों को एहसास की।

तरानों को एहसास की पहचान इशारा दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की कश्ती रोशनी देकर जाती है कदमों संग पुकार दिलाती है।

तरानों को एहसास की समझ कोशिश दिलाती है किनारों को अंदाजों की सोच अरमान देकर जाती है राहों संग पुकार दिलाती है।

तरानों को एहसास की आस नजारा दिलाती है आशाओं को बदलावों की उमंग तलाश देकर जाती है जज्बातों संग पुकार दिलाती है।

तरानों को एहसास की लहर दास्तान दिलाती है इशारों को उजालों की सुबह अफसाना देकर जाती है खयालों संग पुकार दिलाती है।

तरानों को एहसास की सरगम मुस्कान दिलाती है बदलावों को धाराओं की आस इरादा देकर जाती है आवाजों संग पुकार दिलाती है।

तरानों को एहसास की सोच खयाल दिलाती है उम्मीदों को सपनों की आहट सौगात देकर जाती है दिशाओं संग पुकार दिलाती है।

तरानों को एहसास की कहानी आस दिलाती है अरमानों को कदमों की उम्मीद सहारा देकर जाती है इरादों संग पुकार दिलाती है।

तरानों को एहसास की परख बदलाव दिलाती है अदाओं को खयालों की तलाश सोच देकर जाती है नजारों संग पुकार दिलाती है।

तरानों को एहसास की उम्मीद लहर दिलाती है जज्बातों को दिशाओं की कोशिश सरगम देकर जाती है धाराओं संग पुकार दिलाती है।

तरानों को एहसास की सौगात तलाश दिलाती है अदाओं को खयालों की समझ पहचान देकर जाती है आवाजों संग पुकार दिलाती है।


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कविता. ५७८८. तरानों को एहसास की।

                             तरानों को एहसास की। तरानों को एहसास की पहचान इशारा दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की कश्ती रोशनी देकर जाती है कदम...