Saturday, 14 February 2026

कविता. ५७८३. नजारों संग आस अक्सर।

                          नजारों संग आस अक्सर।

नजारों संग आस अक्सर अरमान जगाती है आशाओं की महफिल से जुडकर तलाश दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की पुकार दिलाती है।

नजारों संग आस अक्सर दास्तान जगाती है लहरों की कहानी से मिलकर उमंग दिलाती है उजालों को सपनों की पुकार दिलाती है।

नजारों संग आस अक्सर पहचान जगाती है किनारों की आवाज से जुडकर तराना दिलाती है जज्बातों को राहों की पुकार दिलाती है।

नजारों संग आस अक्सर खयाल जगाती है दास्तानों की समझ से मिलकर सोच दिलाती है कदमों को दिशाओं की पुकार दिलाती है।

नजारों संग आस अक्सर कोशिश जगाती है अंदाजों की पहचान से जुडकर रोशनी दिलाती है उम्मीदों को तरानों की पुकार दिलाती है।

नजारों संग आस अक्सर एहसास जगाती है धाराओं की अहमियत से मिलकर मुस्कान दिलाती है आशाओं को दास्तानों की पुकार दिलाती है।

नजारों संग आस अक्सर आहट जगाती है इरादों की सुबह से जुडकर बदलाव दिलाती है अफसानों को अदाओं की पुकार दिलाती है।

नजारों संग आस अक्सर उमंग जगाती है खयालों की सौगात से मिलकर आवाज दिलाती है बदलावों को सपनों की पुकार दिलाती है।

नजारों संग आस अक्सर तलाश जगाती है एहसासों की राह से जुडकर पहचान दिलाती है आवाजों को अंदाजों की पुकार दिलाती है।

नजारों संग आस अक्सर अंदाज जगाती है उम्मीदों की सोच से मिलकर सुबह दिलाती है तरानों को राहों की पुकार दिलाती है।

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कविता. ५७८३. नजारों संग आस अक्सर।

                          नजारों संग आस अक्सर। नजारों संग आस अक्सर अरमान जगाती है आशाओं की महफिल से जुडकर तलाश दिलाती है लम्हों को अल्फाजों ...