Tuesday, 17 February 2026

कविता. ५७८६. तरानों की पुकार संग।

                             तरानों की पुकार संग।

तरानों की पुकार संग खयालों से जुडकर उम्मीद इशारा दिलाती है लहरों को जज्बातों की रोशनी समझ देकर आगे बढती जाती है।

तरानों की पुकार संग किनारों से जुडकर मुस्कान अफसाना दिलाती है दास्तानों को लम्हों की कहानी सोच देकर आगे बढती जाती है।

तरानों की पुकार संग एहसासों से जुडकर समझ पहचान दिलाती है सपनों को अंदाजों की आस एहसास देकर आगे बढती जाती है।

तरानों की पुकार संग अरमानों से जुडकर परख सुबह दिलाती है आशाओं को नजारों की सरगम दास्तान देकर आगे बढती जाती है।

तरानों की पुकार संग अंदाजों से जुडकर अल्फाज कोशिश दिलाती है धाराओं को उजालों की सोच देकर आगे बढती जाती है।

तरानों की पुकार संग लम्हों से जुडकर आवाज मुस्कान दिलाती है अंदाजों को राहों की सौगात देकर आगे बढती जाती है।

तरानों की पुकार संग कदमों से जुडकर लहर बदलाव दिलाती है किनारों को सपनों की अहमियत देकर आगे बढती जाती है।

तरानों की पुकार संग दिशाओं से जुडकर आस अफसाना दिलाती है बदलावों को धाराओं की समझ देकर आगे बढती जाती है।

तरानों की पुकार संग अल्फाजों से जुडकर सोच किनारा दिलाती है उजालों को एहसासों की कोशिश देकर आगे बढती जाती है।

तरानों की पुकार संग कदमों से जुडकर आहट उमंग दिलाती है अरमानों को इरादों की पहचान देकर आगे बढती जाती है।




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कविता. ५७८६. तरानों की पुकार संग।

                             तरानों की पुकार संग। तरानों की पुकार संग खयालों से जुडकर उम्मीद इशारा दिलाती है लहरों को जज्बातों की रोशनी समझ ...