Monday, 2 February 2026

कविता. ५७७१. इशारों की तलाश संग।

                          इशारों की तलाश संग।

इशारों की तलाश संग आशाओं से जुडकर रोशनी देकर जाती है कदमों को अल्फाजों की उमंग तराना सुनाकर जाती है।

इशारों की तलाश संग दिशाओं से जुडकर एहसास देकर जाती है खयालों को सपनों की आहट तराना सुनाकर जाती है।

इशारों की तलाश संग नजारों से जुडकर लहर देकर जाती है आवाजों को धाराओं की समझ तराना सुनाकर जाती है।

इशारों की तलाश संग उजालों से जुडकर पुकार देकर जाती है अरमानों को किनारों की मुस्कान तराना सुनाकर जाती है।

इशारों की तलाश संग कदमों से जुडकर उम्मीद देकर जाती है अंदाजों को लम्हों की महफिल तराना सुनाकर जाती है।

इशारों की तलाश संग अफसानों से जुडकर राह देकर जाती है बदलावों को उम्मीदों की सौगात तराना सुनाकर जाती है।

इशारों की तलाश संग आवाजों से जुडकर मुस्कान देकर जाती है उजालों को दास्तानों की सोच तराना सुनाकर जाती है।

इशारों की तलाश संग जज्बातों से जुडकर अफसाना देकर जाती है आशाओं को अंदाजों की कोशिश तराना सुनाकर जाती है।

इशारों की तलाश संग लम्हों से जुडकर किनारा देकर जाती है कदमों को एहसासों की दुनिया तराना सुनाकर जाती है।

इशारों की तलाश संग खयालों से जुडकर सपना देकर जाती है लहरों को आवाजों की धून तराना सुनाकर जाती है।

No comments:

Post a Comment

कविता. ५७७१. इशारों की तलाश संग।

                          इशारों की तलाश संग। इशारों की तलाश संग आशाओं से जुडकर रोशनी देकर जाती है कदमों को अल्फाजों की उमंग तराना सुनाकर जा...