Sunday, 22 February 2026

कविता. ५७९१. हर बार कोई उम्मीद संग।

                          हर बार कोई उम्मीद संग।

हर बार कोई उम्मीद संग सरगम तलाश दिलाती है सपनों की आहट अक्सर आशाओं से जज्बात संग सौगात दिलाती है।

हर बार कोई उम्मीद संग आवाज एहसास दिलाती है लहरों की पुकार अक्सर खयालों को पहचान संग सौगात दिलाती है।

हर बार कोई उम्मीद संग रोशनी सपना दिलाती है एहसासों की कोशिश अक्सर लम्हों को राह संग सौगात दिलाती है।

हर बार कोई उम्मीद संग परख उजाला दिलाती है इशारों की तलाश अक्सर अफसानों को रोशनी संग सौगात दिलाती है।

हर बार कोई उम्मीद संग सुबह खयाल‌ दिलाती है किनारों की आस अक्सर उजालों को तलाश संग सौगात दिलाती है।

हर बार कोई उम्मीद संग सोच कोशिश दिलाती है अंदाजों की पहचान अक्सर तरानों को उमंग संग सौगात दिलाती है।

हर बार कोई उम्मीद संग जज्बात मुस्कान दिलाती है राहों की अहमियत अक्सर दिशाओं को कोशिश संग सौगात दिलाती है।

हर बार कोई उम्मीद संग आहट सरगम दिलाती है कदमों की आस अक्सर नजारों को मुस्कान संग सौगात दिलाती है।

हर बार कोई उम्मीद संग लहर अंदाज दिलाती है तरानों की रोशनी अक्सर अफसानों को समझ संग सौगात दिलाती है।

हर बार कोई उम्मीद संग कोशिश इशारा दिलाती है अरमानों की दास्तान अक्सर राहों को कोशिश संग सौगात दिलाती है।



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कविता. ५७९१. हर बार कोई उम्मीद संग।

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