Sunday, 10 May 2026

कविता. ५८६८ अदाओं की महफिल से।

                             अदाओं की महफिल से।

अदाओं की महफिल से नजारों की तलाश इशारा दिलाती है कदमों को अल्फाजों की समझ एहसास सुनाती है तरानों को सरगम दिलाती है।

अदाओं की महफिल से अंदाजों की मुस्कान जज्बात दिलाती है दिशाओं को दास्तानों की पहचान उमंग सुनाती है धाराओं को सरगम दिलाती है।

अदाओं की महफिल से अरमानों की सोच दास्तान दिलाती है किनारों को आवाजों की अहमियत कोशिश सुनाती है राहों को सरगम दिलाती है।

अदाओं की महफिल से दिशाओं की परख सौगात दिलाती है लहरों को उम्मीदों की सौगात बदलाव सुनाती है अंदाजों को सरगम दिलाती है।

अदाओं की महफिल से लहरों की समझ पुकार दिलाती है आशाओं को खयालों की रोशनी सोच सुनाती है नजारों को सरगम दिलाती है।

अदाओं की महफिल से जज्बातों की आस कोशिश दिलाती है दास्तानों को अफसानों की उम्मीद सपना सुनाती है आवाजों को सरगम दिलाती है।

अदाओं की महफिल से किनारों की समझ आवाज दिलाती है उजालों को सपनों की आहट तलाश सुनाती है अल्फाजों को सरगम दिलाती है।

अदाओं की महफिल से इरादों की उमंग आहट दिलाती है बदलावों को धाराओं की पुकार दास्तान सुनाती है जज्बातों को सरगम दिलाती है।

अदाओं की महफिल से लम्हों की राह खयाल दिलाती है अरमानों को तरानों की अहमियत पहचान सुनाती है अफसानों को सरगम दिलाती है।

अदाओं की महफिल से आशाओं की आवाज इरादा दिलाती है एहसासों को उम्मीदों की कहानी सोच सुनाती है खयालों को सरगम दिलाती है।

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