Tuesday, 19 May 2026

कविता. ५८७७ अरमानों को लम्हों की।

 

                          अरमानों को लम्हों की।

अरमानों को लम्हों की कहानी अक्सर पहचान दिलाती है कदमों को अल्फाजों की मुस्कान संग आवाज दिलाती है।

अरमानों को लम्हों की रोशनी अक्सर दास्तान दिलाती है उजालों को आशाओं की अहमियत संग आवाज दिलाती है।

अरमानों को लम्हों की तलाश अक्सर जज्बात दिलाती है अंदाजों को अफसानों की कहानी संग आवाज दिलाती है।

अरमानों को लम्हों की आस अक्सर एहसास दिलाती है धाराओं को उम्मीदों की सरगम संग आवाज दिलाती है।

अरमानों को लम्हों की दुनिया अक्सर तराना दिलाती है बदलावों को एहसासों की उमंग संग आवाज दिलाती है।

अरमानों को लम्हों की अहमियत अक्सर तलाश दिलाती है इशारों को खयालों की पहचान संग आवाज‌ दिलाती है।

अरमानों को लम्हों की आहट अक्सर बदलाव दिलाती है तरानों को दास्तानों की सौगात संग आवाज दिलाती है।

अरमानों को लम्हों की सरगम अक्सर लहर‌ दिलाती है जज्बातों को किनारों की मुस्कान संग आवाज दिलाती है।

अरमानों को लम्हों की सौगात अक्सर सुबह दिलाती है इरादों को जज्बातों की पुकार संग आवाज दिलाती है।

अरमानों को लम्हों की कोशिश अक्सर नजारा दिलाती है अंदाजों को सपनों की पहचान संग आवाज दिलाती है।

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कविता. ५८७७ अरमानों को लम्हों की।

                            अरमानों को लम्हों की। अरमानों को लम्हों की कहानी अक्सर पहचान दिलाती है कदमों को अल्फाजों की मुस्कान संग आवाज दिल...