Thursday, 14 May 2026

कविता. ५८७२ आवाज की अहमियत संग।

 

                    आवाज की अहमियत संग।

आवाज की अहमियत संग अरमान‌ से आशाओं की कहानी दिलाती है उजालों को लम्हों की रोशनी नजारा दिलाती है।

आवाज की अहमियत संग सुबह से किनारों की तलाश दिलाती है इशारों को अदाओं की पहचान नजारा दिलाती है।

आवाज की अहमियत संग कोशिश से सपनों की समझ दिलाती है अफसानों को दिशाओं की सोच नजारा दिलाती है।

आवाज की अहमियत संग दास्तान से लम्हों की महफिल दिलाती है अंदाजों को एहसासों की आस नजारा दिलाती है।

आवाज की अहमियत संग उमंग से अफसानों की परख दिलाती है तरानों को बदलावों की पुकार नजारा दिलाती है।

आवाज की अहमियत संग सोच से खयालों की सरगम दिलाती है धाराओं को राहों की उम्मीद नजारा दिलाती है।

आवाज की अहमियत संग अल्फाज से तरानों की सुबह दिलाती है जज्बातों को धाराओं की समझ नजारा दिलाती है।

आवाज की अहमियत संग मुस्कान से इरादों की अंदाज दिलाती है कदमों को उम्मीदों की आस नजारा दिलाती है।

आवाज की अहमियत संग लहर से‌ अंदाजों की मुस्कान दिलाती है अरमानों को आशाओं की सौगात नजारा दिलाती है।

आवाज की अहमियत संग आस से अफसानों की कोशिश दिलाती है दास्तानों को किनारों की महफिल नजारा दिलाती है।


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कविता. ५८७२ आवाज की अहमियत संग।

                      आवाज की अहमियत संग। आवाज की अहमियत संग अरमान‌ से आशाओं की कहानी दिलाती है उजालों को लम्हों की रोशनी नजारा दिलाती है। आ...