Monday, 11 May 2026

कविता. ५८६९ कदमों की सरगम संग।

                           कदमों की सरगम संग।

कदमों की सरगम संग आवाजों से जुडकर धून एहसास सुनाती है तरानों को बदलावों की सौगात पहचान दिलाती है।

कदमों की सरगम संग किनारों से जुडकर राह अल्फाज सुनाती है इशारों को खयालों की आस पहचान दिलाती है।

कदमों की सरगम संग आशाओं से जुडकर लहर अंदाज सुनाती है उजालों को सपनों की पुकार पहचान दिलाती है।

कदमों की सरगम संग धाराओं से जुडकर तलाश कोशिश सुनाती है दिशाओं को अरमानों की परख पहचान दिलाती है।

कदमों की सरगम संग अदाओं से जुडकर रोशनी खयाल सुनाती है उम्मीदों को इशारों की सोच पहचान दिलाती है।

कदमों की सरगम संग राहों से जुडकर सुबह दास्तान सुनाती है अफसानों को लहरों की कहानी पहचान दिलाती है।

कदमों की सरगम संग जज्बातों से जुडकर उमंग इरादा सुनाती है धाराओं को किनारों की समझ पहचान दिलाती है।

कदमों की सरगम संग नजारों से जुडकर अल्फाज मुस्कान सुनाती है लम्हों को एहसासों की सोच पहचान दिलाती है।

कदमों की सरगम संग अंदाजों से जुडकर उम्मीद परख सुनाती है आशाओं को जज्बातों की आहट पहचान दिलाती है।

कदमों की सरगम संग दिशाओं से जुडकर कोशिश आवाज सुनाती है अरमानों को आशाओं की महफिल पहचान दिलाती है।

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कविता. ५८६९ कदमों की सरगम संग।

                           कदमों की सरगम संग। कदमों की सरगम संग आवाजों से जुडकर धून एहसास सुनाती है तरानों को बदलावों की सौगात पहचान दिलाती ...