Friday, 8 May 2026

कविता. ५८६६ किनारों की आवाज संग।

                           किनारों की आवाज संग।

किनारों की आवाज संग इरादों से जुडकर अदाओं की कोशिश सरगम सुनाती है अल्फाजों को राहों की रोशनी उमंग दिलाती है।

किनारों की आवाज संग धाराओं से जुडकर लहरों की पुकार कहानी सुनाती है लम्हों को एहसासों की सौगात उमंग दिलाती है।

किनारों की आवाज संग दिशाओं से जुडकर दास्तानों की धून तलाश सुनाती है तरानों को लहरों की पहचान उमंग दिलाती है।

किनारों की आवाज संग नजारों से जुडकर जज्बातों की मुस्कान खयाल सुनाती है आशाओं को अंदाजों की सोच उमंग दिलाती है।

किनारों की आवाज संग एहसासों से जुडकर कदमों की रोशनी पुकार सुनाती है इशारों को दास्तानों की समझ उमंग दिलाती है।

किनारों की आवाज संग राहों से जुडकर धाराओं की समझ पहचान सुनाती है उजालों को अरमानों की परख उमंग दिलाती है।

किनारों की आवाज संग सपनों से जुडकर राहों की आहट तराना सुनाती है जज्बातों को बदलावों की आस उमंग दिलाती है।

किनारों की आवाज संग दास्तानों से जुडकर कदमों की सौगात उम्मीद सुनाती है अरमानों को तरानों की पुकार उमंग दिलाती है।

किनारों की आवाज संग अंदाजों से जुडकर लम्हों की कहानी सोच सुनाती है लहरों को खयालों की सरगम उमंग दिलाती है।

किनारों की आवाज संग खयालों से जुडकर अल्फाजों की धून सपना सुनाती है अफसानों को धाराओं की समझ उमंग दिलाती है।



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कविता. ५८६६ किनारों की आवाज संग।

                           किनारों की आवाज संग। किनारों की आवाज संग इरादों से जुडकर अदाओं की कोशिश सरगम सुनाती है अल्फाजों को राहों की रोशनी...