Saturday, 2 May 2026

कविता. ५८६०. किनारों को सपनों की आहट।

                        किनारों को सपनों की आहट।

किनारों को सपनों की आहट कुछ एहसास दिलाती है तरानों को बदलावों की समझ अफसाना सुनाती है दिशाओं को नजारों का तराना सुनाती है।

किनारों को सपनों की आहट कुछ उम्मीद दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की दुनिया सरगम सुनाती है उजालों को जज्बातों का तराना सुनाती है।

किनारों को सपनों की आहट कुछ अरमान दिलाती है अंदाजों से इरादों की सुबह खयाल सुनाती है बदलावों को धाराओं का तराना सुनाती है।

किनारों को सपनों की आहट कुछ उमंग दिलाती है दिशाओं से आशाओं की पहचान आस सुनाती है लहरों को राहों का तराना सुनाती है।

किनारों को सपनों की आहट कुछ कोशिश दिलाती है अल्फाजों से उजालों की कोशिश दास्तान सुनाती है खयालों को अदाओं का तराना सुनाती है।

किनारों को सपनों की आहट कुछ आवाज दिलाती है एहसासों से दिशाओं की महफिल अरमान सुनाती है लम्हों को उजालों का तराना सुनाती है।

किनारों को सपनों की आहट कुछ पहचान दिलाती है आवाजों से दास्तानों की सौगात तलाश सुनाती है कदमों को अरमानों का तराना सुनाती है।

किनारों को सपनों की आहट कुछ परख दिलाती है कदमों से अफसानों की सोच कोशिश सुनाती है आशाओं को अंदाजों का तराना सुनाती है।

किनारों को सपनों की आहट कुछ रोशनी दिलाती है अरमानों से उम्मीदों की समझ इशारा सुनाती है आवाजों को लहरों का तराना सुनाती है।

किनारों को सपनों की आहट कुछ तलाश दिलाती है राहों से अफसानों की अहमियत मुस्कान सुनाती है इशारों को अल्फाजों का तराना सुनाती है।

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कविता. ५८६०. किनारों को सपनों की आहट।

                        किनारों को सपनों की आहट। किनारों को सपनों की आहट कुछ एहसास दिलाती है तरानों को बदलावों की समझ अफसाना सुनाती है दिशाओ...