Wednesday, 13 May 2026

कविता. ५८७१ उम्मीद कोई।

                                 उम्मीद कोई।

उम्मीद कोई कहानी सुनाकर जाती है जज्बातों को बदलावों की समझ दिलाती है खयालों को कदमों की पुकार रोशनी दिलाती है।

उम्मीद कोई सरगम सुनाकर जाती है सपनों को अंदाजों की‌ तलाश दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की कोशिश रोशनी दिलाती है।

उम्मीद कोई आवाज सुनाकर जाती है अदाओं को एहसासों की आस दिलाती है धाराओं को अरमानों की सोच रोशनी दिलाती है।

उम्मीद कोई पुकार सुनाकर जाती है आवाजों को इरादों की पहचान दिलाती है दिशाओं को लहरों की आहट रोशनी दिलाती है।

उम्मीद कोई सोच सुनाकर जाती है अंदाजों को किनारों की सुबह दिलाती है अफसानों को राहों की अहमियत रोशनी दिलाती है।

उम्मीद कोई तराना सुनाकर जाती है अल्फाजों को धाराओं की मुस्कान दिलाती है उजालों को आशाओं की महफिल रोशनी दिलाती है।

उम्मीद कोई दास्तान सुनाकर जाती है नजारों को आवाजों की धून दिलाती है तरानों को एहसासों की समझ रोशनी दिलाती है।

उम्मीद कोई उमंग सुनाकर जाती है दास्तानों को लहरों की आस अरमान दिलाती है जज्बातों को इशारों की तलाश रोशनी दिलाती है।

उम्मीद कोई अल्फाज सुनाकर जाती है तरानों को खयालों की सौगात दिलाती है किनारों को आशाओं की आस रोशनी दिलाती है।

उम्मीद कोई कोशिश सुनाकर जाती है धाराओं को कदमों की सुबह दिलाती है अदाओं को राहों की पहचान रोशनी दिलाती है।

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कविता. ५८७१ उम्मीद कोई।

                                 उम्मीद कोई। उम्मीद कोई कहानी सुनाकर जाती है जज्बातों को बदलावों की समझ दिलाती है खयालों को कदमों की पुकार र...