Sunday, 3 May 2026

कविता. ५८६१. खयालों की पुकार संग।

                            खयालों की पुकार संग।

खयालों की पुकार संग आशाओं की महफिल सपना‌‌ दिलाती है लहरों को जज्बातों की रोशनी मुस्कान दिलाती है अदाओं की कहानी दिलाती है।

खयालों की पुकार संग कदमों की सौगात कोशिश दिलाती है अल्फाजों को किनारों की सोच इरादा दिलाती है जज्बातों की कहानी दिलाती है।

खयालों की पुकार संग धाराओं की समझ सरगम दिलाती है इरादों को एहसासों की उमंग बदलाव दिलाती है तरानों की कहानी दिलाती है।

खयालों की पुकार संग राहों की आस अफसाना दिलाती है आवाजों को कदमों की सुबह उमंग दिलाती है अरमानों की कहानी दिलाती है।

खयालों की पुकार संग दास्तानों की लहर पहचान दिलाती है नजारों को दिशाओं की महफिल आहट दिलाती है राहों की कहानी दिलाती है।

खयालों की पुकार संग इशारों की तलाश आस दिलाती है उम्मीदों को बदलावों की आस समझ दिलाती है धाराओं की कहानी दिलाती है।

खयालों की पुकार संग अल्फाजों की सोच राह दिलाती है कदमों को आशाओं की सरगम लम्हा दिलाती है आशाओं की कहानी दिलाती है।

खयालों की पुकार संग अदाओं की लहर एहसास दिलाती है किनारों को दास्तानों की आवाज मुस्कान दिलाती है अंदाजों की कहानी दिलाती है।

खयालों की पुकार संग अरमानों की उम्मीद उजाला दिलाती है अफसानों को कदमों की पहचान नजारा दिलाती है इरादों की कहानी दिलाती है।

खयालों की पुकार संग दिशाओं की पहचान कोशिश दिलाती है बदलावों को सपनों की सुबह तलाश दिलाती है आवाजों की कहानी दिलाती है।

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कविता. ५८६१. खयालों की पुकार संग।

                            खयालों की पुकार संग। खयालों की पुकार संग आशाओं की महफिल सपना‌‌ दिलाती है लहरों को जज्बातों की रोशनी मुस्कान दिला...