Friday, 22 May 2026

कविता. ५८८० ‌‌ अल्फाजों की सुबह अक्सर।

 

                     अल्फाजों की सुबह अक्सर।

अल्फाजों की सुबह अक्सर आशाओं का एहसास दिलाती है जज्बातों को इशारों की पहचान बदलाव देकर जाती है कदमों की रोशनी दिलाती है।

अल्फाजों की सुबह अक्सर नजारों का इरादा दिलाती है आवाजों को धाराओं की समझ अहमियत देकर जाती है अंदाजों की रोशनी दिलाती है।

अल्फाजों की सुबह अक्सर धाराओं का अफसाना दिलाती है तरानों को बदलावों की मुस्कान सरगम देकर जाती है राहों की रोशनी दिलाती है।

अल्फाजों की सुबह अक्सर अरमानों का बदलाव दिलाती है दिशाओं को अफसानों की सोच कोशिश देकर जाती है तरानों की रोशनी दिलाती है।

अल्फाजों की सुबह अक्सर दिशाओं का उजाला दिलाती है एहसासों को उजालों की आस पुकार देकर जाती है किनारों की रोशनी दिलाती है।

अल्फाजों की सुबह अक्सर अंदाजों का किनारा दिलाती है लहरों को कहानी की सौगात तलाश देकर जाती है खयालों की रोशनी दिलाती है।

अल्फाजों की सुबह अक्सर सपनों का इशारा दिलाती है अरमानों को जज्बातों की अहमियत मुस्कान देकर जाती है उम्मीदों की रोशनी दिलाती है।

अल्फाजों की सुबह अक्सर खयालों का तराना‌ दिलाती है कदमों को लम्हों की कोशिश दास्तान देकर जाती है आशाओं की रोशनी दिलाती है।

अल्फाजों की सुबह अक्सर दास्तानों का उमंग दिलाती है अंदाजों को किनारों की उम्मीद आहट देकर जाती है राहों की रोशनी दिलाती है।

अल्फाजों की सुबह अक्सर आवाजों का नजारा दिलाती है लहरों को दिशाओं की महफिल पुकार देकर जाती है धाराओं की रोशनी दिलाती है।

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कविता. ५८८० ‌‌ अल्फाजों की सुबह अक्सर।

                       अल्फाजों की सुबह अक्सर। अल्फाजों की सुबह अक्सर आशाओं का एहसास दिलाती है जज्बातों को इशारों की पहचान बदलाव देकर जाती ह...