Sunday, 13 July 2025

कविता. ५५६७. इशारों को जज्बातों संग।

                           इशारों को जज्बातों संग।

इशारों को जज्बातों संग आशाओं की महफिल दिलाती है लहरों को अंदाजों की समझ अक्सर तराना देकर जाती है।

इशारों को जज्बातों संग अल्फाजों की दुनिया दिलाती है किनारों को अरमानों की रोशनी अक्सर सपना देकर जाती है।

इशारों को जज्बातों संग खयालों की उमंग दिलाती है एहसासों को नजारों की पहचान अक्सर आवाज देकर जाती है।

इशारों को जज्बातों संग किनारों की कोशिश दिलाती है लम्हों को दास्तानों की सौगात अक्सर बदलाव देकर जाती है।

इशारों को जज्बातों संग उजालों की सुबह दिलाती है राहों को अफसानों की समझ अक्सर अहमियत देकर जाती है।

इशारों को जज्बातों संग कदमों की पुकार दिलाती है उम्मीदों को इरादों की सरगम अक्सर पहचान देकर जाती है।

इशारों को जज्बातों संग अंदाजों की रोशनी दिलाती है अल्फाजों को खयालों की उमंग अक्सर परख देकर जाती है।

इशारों को जज्बातों संग धाराओं की कोशिश दिलाती है बदलावों को तरानों की आहट अक्सर सरगम देकर जाती है।

इशारों को जज्बातों संग लहरों की उम्मीद दिलाती है उजालों को आशाओं की तलाश अक्सर अदा देकर जाती है।

इशारों को जज्बातों संग दास्तानों की समझ दिलाती है अफसानों को कदमों की पुकार अक्सर मुस्कान देकर जाती है।

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