Thursday, 27 June 2024

कविता. ५२१६. उमंग जब किसी।

                                  उमंग जब किसी।

उमंग जब किसी खयाल को इशारा देती है किनारों को अल्फाजों की सुबह अरमानों की धारा देती है जज्बातों को अंदाजों का सहारा देती है।

उमंग जब किसी कोशिश को सपना देती है आशाओं को बदलावों की मुस्कान तरानों की पुकार देती है अदाओं को एहसासों का सहारा देती है।

उमंग जब किसी सौगात को तलाश देती है कदमों को दास्तानों की उम्मीद लहरों की कहानी देती है आवाजों को खयालों का सहारा देती है।

उमंग जब किसी रोशनी को आहट देती है नजारों को दिशाओं की पहचान लम्हों की अहमियत देती है इरादों को सपनों का सहारा देती है।

उमंग जब किसी आवाज को धून देती है अरमानों को लम्हों की समझ अल्फाजों की सुबह देती है एहसासों को राहों का सहारा देती है।

उमंग जब किसी सोच को बदलाव देती है अंदाजों को धाराओं की आवाज तरानों की इरादा देती है किनारों को अफसानों का सहारा देती है।

उमंग जब किसी सरगम को समझ देती है आवाजों को उम्मीदों की तलाश खयालों की सोच देती है बदलावों को लम्हों का सहारा देती है।

उमंग जब किसी मुस्कान को सुबह देती है इरादों को तरानों की कहानी एहसासों की कोशिश देती है नजारों को दिशाओं का सहारा देती है।

उमंग जब किसी आस को आहट देती है अफसानों को राहों की सोच अरमानों की पुकार देती है दास्तानों को आशाओं का सहारा देती है।

उमंग जब किसी अदा को अहमियत देती है धाराओं को उजालों की सुबह बदलावों की मुस्कान देती है कदमों को अदाओं का सहारा देती है।

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