Tuesday, 19 August 2025

कविता. ५६०४. खयालों संग उम्मीदों की।

                           खयालों संग उम्मीदों की।

खयालों संग उम्मीदों की पहचान इरादा देकर जाती है आवाजों की धून अक्सर इशारों संग अंदाजों की सरगम सुनाती है।

खयालों संग उम्मीदों की आस अफसाना देकर जाती है दास्तानों की समझ अक्सर जज्बातों संग राहों की पुकार सुनाती है।

खयालों संग उम्मीदों की परख मुस्कान देकर जाती है तरानों की आहट अक्सर अल्फाजों संग अरमानों की आस सुनाती है।

खयालों संग उम्मीदों की पुकार उजाला देकर जाती है नजारों की सरगम अक्सर दास्तानों संग दिशाओं की पहचान सुनाती है।

खयालों संग उम्मीदों की आहट बदलाव देकर जाती है आशाओं की सौगात अक्सर कदमों संग लहरों की कहानी सुनाती है।

खयालों संग उम्मीदों की समझ सुबह देकर जाती है अंदाजों की आस अक्सर लम्हों संग एहसासों की कोशिश सुनाती है।

खयालों संग उम्मीदों की सोच उमंग देकर जाती है अरमानों की सोच अक्सर दिशाओं संग उजालों की आहट सुनाती है।

खयालों संग उम्मीदों की आवाज सौगात देकर जाती है अदाओं की उमंग अक्सर किनारों संग इरादों की सोच सुनाती है।

खयालों संग उम्मीदों की रोशनी एहसास देकर जाती है कदमों की पुकार अक्सर आशाओं संग तरानों की कोशिश सुनाती है।

खयालों संग उम्मीदों की दास्तान सोच देकर जाती है अदाओं की दुनिया अक्सर बदलावों संग धाराओं की सुबह सुनाती है।




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