Friday, 2 May 2025

कविता. ५४९५. किनारों से खयालों की।

                          किनारों से खयालों की।

किनारों से खयालों की सरगम अरमान जगाती है आवाजों की धून अक्सर अल्फाज देकर जाती है कदमों की सौगात दिलाती है।

किनारों से खयालों की राह एहसास जगाती है दास्तानों की पहचान अक्सर उम्मीद देकर जाती है अफसानों की सौगात दिलाती है।

किनारों से खयालों की पुकार मुस्कान जगाती है दिशाओं की समझ अक्सर लम्हा देकर जाती है नजारों की सौगात दिलाती है।

किनारों से खयालों की समझ जज्बात जगाती है इरादों की सुबह अक्सर अहमियत देकर जाती है दास्तानों की सौगात दिलाती है।

किनारों से खयालों की कोशिश उम्मीद जगाती है अरमानों की अल्फाज अक्सर अंदाज देकर जाती है तरानों की सौगात दिलाती है।

किनारों से खयालों की परख तलाश जगाती है लहरों की कहानी अक्सर आवाज देकर जाती है बदलावों की सौगात दिलाती है।

किनारों से खयालों की रोशनी आस दिलाती है उजालों की उमंग अक्सर सरगम देकर जाती है आशाओं की सौगात दिलाती है।

किनारों से खयालों की पहचान अंदाज दिलाती है नजारों की सोच अक्सर सुबह देकर जाती है दिशाओं की सौगात दिलाती है।

किनारों से खयालों की अदा सपना दिलाती है अफसानों की परख अक्सर मुस्कान देकर जाती है राहों की सौगात दिलाती है।

किनारों से खयालों की लहर अल्फाज दिलाती है आशाओं की महफिल अक्सर सोच देकर जाती है उम्मीदों की सौगात दिलाती है।

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