Tuesday, 10 March 2026

कविता. ५८०७. एक उजियारे संग अरमान।

                          एक उजियारे संग अरमान। 

एक उजियारे संग अरमान आशाओं की कहानी दिलाते है तरानों को बदलावों की समझ आवाज दिलाती है कदमों को सुबह इशारा दिलाती है।

एक उजियारे संग अरमान राहों की रोशनी दिलाते है खयालों को नजारों की महफिल अल्फाज दिलाती है इरादों को लहर इशारा दिलाती है।

एक उजियारे संग अरमान किनारों की मुस्कान दिलाते है अंदाजों को सपनों की सोच कोशिश दिलाती है लम्हों को आस इशारा दिलाती है।

एक उजियारे संग अरमान उम्मीदों की सौगात दिलाते है बदलावों को धाराओं की उमंग सोच दिलाती है किनारों को समझ इशारा दिलाती है।

एक उजियारे संग अरमान जज्बातों की पुकार दिलाते है इरादों को एहसासों की आस तलाश दिलाती है नजारों को सोच इशारा दिलाती है।

एक उजियारे संग अरमान अंदाजों की सोच दिलाते है धाराओं को उम्मीदों की सौगात पहचान दिलाती है तरानों को खयाल इशारा दिलाती है।

एक उजियारे संग अरमान सपनों की परख दिलाते है आशाओं को एहसासों की आस कोशिश दिलाती है लम्हों को पुकार इशारा दिलाती है।

एक उजियारे संग अरमान कदमों की आहट दिलाते है दास्तानों को अदाओं की धून अहमियत दिलाती है अल्फाजों को राह‌ इशारा दिलाती है।

एक उजियारे संग अरमान दिशाओं की महफिल दिलाते है जज्बातों को कदमों की समझ उमंग दिलाती है अफसानों को लहर इशारा दिलाती है।

एक उजियारे संग अरमान तरानों की अहमियत दिलाते है अंदाजों को दिशाओं की महफिल सहारा दिलाती है अदाओं को राह इशारा दिलाती है।

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कविता. ५८०७. एक उजियारे संग अरमान।

                          एक उजियारे संग अरमान।  एक उजियारे संग अरमान आशाओं की कहानी दिलाते है तरानों को बदलावों की समझ आवाज दिलाती है कदमों...